अश्वगंधा : हृदय को मजबूत बनाने वाला आयुर्वेदिक उपाय
आयुर्वेद , भारतीय चिकित्सा पद्धति का एक प्राचीन विज्ञान है , जो जीवन के पोर्टफोलियो को अधिकृत करता है । इसमें कई औषधीय और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग होता है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं । इन जड़ी - बूटियों में से एक महत्वपूर्ण नाम है अश्वगंधा। यह एक ऐसा चमत्कारी दिल है जो शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के साथ - साथ दिल को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
अश्वगंधा का परिचय
अश्वगंधा , जिसे वैज्ञानिक रूप से विथानिया सोम्निफेरा के नाम से जाना जाता है , एक अनमोल औषधि है। इसे भारतीय रीनंग भी कहा जाता है। इसका मुख्य उपयोग शारीरिक शक्ति और मानसिक संतुलन बनाए रखना है , लेकिन इसका हृदय संबंधी लाभ भी कम महत्वपूर्ण नहीं है । आयुर्वेद में अश्वगंधा का उपयोग तनाव को कम करने , ऊर्जा स्तर को बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
हृदय स्वास्थ्य और अश्वगंधा का संबंध
हृदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है , जो पूरे शरीर में रक्त का संचार करता है । इनमें भागदौड़ भारी व्यक्तित्व , आदर्श खान - पान , और मानसिक तनाव के कारण हृदय पर अधिक दबाव पड़ता है , जिससे हृदय संबंधी विकार जैसे उच्च रक्तचाप , हृदय की दृष्टि का होना , और हृदय का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है । इन अध्ययनों से पता चलता है कि अश्वगंधा का औषधीय उपचार विशेष रूप से प्रभावी होता है।
तनाव और दिल पर असर
मानसिक तनाव हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत विनाशकारी होता है। तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है , जो रक्तचाप को बढ़ाने के साथ - साथ हृदय पर दबाव डालता है । लंबे समय तक तनाव में रहने से हृदय रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है। अश्वगंधा एक प्रभावशाली एडाप्टोजेन के रूप में काम करता है , जो शरीर को तनाव से राहत दिलाने में मदद करता है । यह कॉर्टिसोल के स्तर को कम करता है , जिससे मानसिक शांति मिलती है और हृदय पर तनाव कम होता है।
नाज़ुक को नियंत्रित करना
अश्वगंधा का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक है। उच्च रक्तचाप हृदय रोग का एक प्रमुख कारण है , जो हृदय की धमनियों पर दबाव डालता है और हृदय के कार्यों को कठिन बनाता है। अश्वगंधा को नियंत्रित करने से हृदय को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है । यह रक्त बहनों को आराम देता है और रक्त संचार को बंधक बना देता है , जिससे हृदय पर दबाव कम हो जाता है ।
चॉकलेट का संतुलन
हृदय रोग का भी एक प्रमुख कारण है । जब शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल ( एलडीएल) बढ़ता है , तो यह स्तर धमनियों में जमने लगता है , जिससे रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। अश्वगंधा , रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) को बढ़ाने में सहायक होता है। इससे हृदय की धमनियों में अवरोध उत्पन्न होता है और हृदय की धमनियाँ बेहतर होती हैं।
हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाना
अश्वगंधा हृदय की संरचना को भी मजबूत बनाता है। यह हृदय की दृष्टि को पसंद करता है और हृदय के घटकों की शक्ति को पुनः प्राप्त करता है। आयुर्वेद के अनुसार , अश्वगंधा का नियमित सेवन दिल की दवा को बेहतर बनाता है और इसे और अधिक बनाता है । यह हृदय की दवाओं को पुनर्जीवित करना और उन्हें ठीक से काम करने में सहायक होता है।
वैज्ञानिक प्रमाण
अश्वगंधा पर किए गए विभिन्न वैज्ञानिक शोधों ने इसके हृदय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव को प्रमाणित किया है। एक अध्ययन के अनुसार , अश्वगंधा के सेवन से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप में कमी का आकलन किया गया है। इसके अलावा , अश्वगंधा के सेवन से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल में कमी आती है , जिससे हृदय रोगों का खतरा भी कम होता है। कई शोधों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अश्वगंधा रेलवे का स्तर नियंत्रित करने में प्रभावी है , जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
अश्वगंधा का सेवन और उपयोग
अश्वगंधा का सेवन कई सैद्धांतिक तरीकों से किया जा सकता है । इसका सबसे प्रचलित रूप पाउडर ( पाउडर ) है , जिसे दूध या पानी के साथ लिया जा सकता है। इसके अलावा , अश्वगंधा कैप्सूल और टेबलेट के रूप में भी उपलब्ध है। इसके साथ ही , अश्वगंधा काढ़ा और अर्क का भी उपयोग किया जाता है , जो हृदय को विशेष लाभ प्रबंधन में सहायक होते हैं।
अश्वगंधा के अन्य फायदे
अश्वगंधा के हृदय स्वास्थ्य के अलावा और भी कई फायदे हैं , जो इसे एक संपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि बना देता है। यह तनाव और चिंता को कम करता है। मस्तिष्क की कलाकृतियों को पुनः प्राप्त किया गया है। शारीरिक शक्ति और शक्ति को पुनः प्राप्त करना है। उपकरण क्षमता को मजबूत बनाता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।